किस्सों में इक रोज़ सुना था प्रेम खुदा का पूरक है
आज नहीं तो कल मानोगे,जितनी खाक छानलो साथी
इतनी बात मान लो साथी..................
रंग भले ही एक सा खूँ का पर ताशीर ज़ुदा सी है
फिर कैसे कह दू अपनों में मेरा भी तुम नाम लो साथी
इतनी बात मान लो साथी..................
नहीं प्यार का मैं सौदागर जो आँसू से ठग ले जाऊं
नहीं खरीदो मेरे आसूं पर कीमत पहचान लो साथी
इतनी बात मान लो साथी..................
ना अपना कोई रिश्ता था न अपना कोई किस्सा था
फिर भी जिसने तुमको चाहा वो चेहरा पहचान लो साथी
इतनी बात मान लो साथी..................
प्यार पे ग़र अफ़सोस ज़ताया तो होगी तौहीन खुदा की
जहां रहो तुम सदा सुखी हो इस दिल का अरमान लो साथी
इतनी बात मान लो साथी..................इतनी बात मान लो साथी..................