Tuesday, May 31, 2011

सितम......

सितम उसने किये लाखों,सितम मैंने सहे लाखों,
थे इतने पास  फिर भी फासले कैसे रहे लाखों,
ये मुझको एकतरफ़ा इश्क़ की कीमत मिली तो है;
उसे आंसू दिखे,मोती जो आँखों से बहे लाखों.....................

Sunday, May 15, 2011

उसने दिया मुझको .........

मेरी दीवानगी का क्या सिला उसने दिया मुझको,
वजह कोई न दी फिर भी गिला उसने दिया मुझको,
जो ग़म था दूर कोसों कोस मुझसे एक दिन यारों,
हाँ उससे इश्क़ में इक दिन मिला उसने दिया मुझको............