Thursday, February 3, 2011

प्रेम पत्र ...अपनी काल्पनिक प्रेयशी के लिए....

प्रिय परी,
अरसे पहले बड़ा शांत,खामोश, अविचलित और कुछ सूना सा था ये दिल का घरौंदा और तुम न जाने कब इसमें दबे पांव चली आई कभी पता ही नहीं चला.एहसास ही नहीं हो पाया कि कबसे तुम्हारी चाहत इस दिल में बसने लगी.जब रहने को आई थी तो छोटी सी बच्ची थी ये चाहत और आज जब ज़वान हो गयी है तो न जाने कितनी दुविधाएं खड़ी कर देती है.इसकी उम्र तो मैं जानता ही हूँ मेरी ही उम्र के बराबर है पर डर लगता है कि कही ये मुझसे पहले ही अपनी साँसे न तोड़ दे.
लोग कहते हैं कि तुम चाँद हो,कई तो कहते हैं कि तुम चाँद से भी ज्यादा खूबसूरत हो.मेरे लिए ये कोई वज़ह नहीं है तुमसे प्यार करने की.चाँद को मैं रोज़ देखता हूँ,बहुत सुन्दर लगता है पर उस से प्यार नहीं होता है.प्यार तो मैं तुम्हारे शांत सरल और सम्मोहित कर देने वाले विचारों से करता हूँ,तुम्हारी आँखों से करता हूँ जो सारी दुनिया को एक प्यार के बंधन में समेट लेना चाहती हैं.
तुम्हारी आरज़ू ने ऐसे हज़ारों ज़ख्म;जो एक अनश्वर तश्वीर की तरह मेरे दिलो-दिमाग़ पर छाये हुए थे;भर दिए जिन्हें मैं अब कभी उकेरता हूँ तो भी उनके नाम याद नहीं आते.आज लगता है कि तुम मेरी न बन पाओगी तो दिल में दर्द भी है,व्याकुलता भी है.न जाने कौन से ख्यालों में,कल्पनाओं में उलझ जाता हूँ और कभी हारने लगता हूँ तो सोचता हूँ क्या हुआ तुम नहीं हो तुम्हारी आरज़ू के ख्व़ाब तो आज़ भी जिंदा हैं.
कभी कोई लकीरें देखकर कहता है कि तुम मेरी तक़दीर में नहीं हो तो यकीं नहीं होता है पर हाँ अगर ये लकीरें सच बोलती हैं तो मैं चाहूँगा भगवान्! मेरे हाथों कि रेखाएं ऐसे खींचना कि जब भी मैं  अपनी हथेली देखूं तो मुझे अपनी परी के अलावा कुछ और नज़र ही न आये.
मैं जानता हूँ कि तुम्हें भी पता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ परन्तु साथी! कुछ विवश हूँ  मैं और शायद इतना कि कभी तुम्हें एहसास भी न करा पाऊं कि तुमसे कितना प्यार करता हूँ.विवशता कि कोई बहुत बड़ी वज़ह नहीं है ....... पर फिर भी ,दो सभ्यताओं के अंतर को आज़ भी हमारा समाज नकार नहीं पाया है और हमारे परिवार इस समाज को नहीं नकार पाएंगे.
दर्द होता है तो ग़ज़ल से दिल को बहलाने कि कोशिश करता हूँ पर एक-एक शेर ज़ब तुम्हारे विरह की पीड़ा के खजाने को लूटने की कोशिश करता है तो तकलीफ़ और बढ़ जाती है.
कई बार लगा कि अपने दिल का सारा हाल तुम्हें बता दूं कुछ दर्द कम हो जायेगा पर फिर लगता है कि प्यार का चैन तो पल दो पल का है उम्र भर तो दर्द ही साथ दे पायेगा, और फिर उसी दर्द को न बाँटने कि हदें ही मेरे दिल को ख़ामोश रहने पर मज़बूर कर देती हैं.जब तुम दिखती थीं तो तुमसे नज़रें भी नहीं मिला पाता था,जितना करीब थे उतना ही दूर जाने का डर बढ़ जाता था और आज जब दूर हो तो अजनबी भीड़ को देखकर भी कदम रुक जाते हैं कि शायद कहीं तुम दिख जाओ.
ऐसा नहीं है कि तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगा पर थोड़ी तकलीफ़ ज़रूर होगी.मैं जानता हूँ तुम मेरी नहीं हो,मुझे हासिल नहीं हो पाओगी.मेरे दिल से दूर,कही ऐसे अँधेरे में खो जाओगी जिसे मैं कभी ढूंढ भी नहीं पाऊं,पर,जो प्यार हासिल नहीं हो पाए और जो हासिल हुआ है उससे प्यार करने के फ़र्क में दिल में एक ज़रा सी ज़गह बच जाती है ज़हां तुम्हारे प्यार कि मशाल हमेशा जलती रहेगी.
कभी तुमसे कुछ कह नहीं पाया, पर आज़ न जाने क्या क्या इस पत्र में लिख दिया है.ख़ैर............
और हाँ तुम्हारी आखों के काज़ल को खूबसूरत कहने वालों कि कोई गिनती नहीं होगी पर मैं कहना चाहता हूँ कि तुम सलामत रखना अपनी खूबसूरती को,हिफाज़त से रखना अपने सरल स्वभाव को,संजोकर रखना रिश्तों कि अहमियत को,समेटकर रखना अपनों कि यादों को कायम रखना सबकी  उम्मीदों को और सबसे बड़ी बात संभालकर रखना अपने आपको.मेरा क्या है..........बस ज़िन्दगी ही तो जीनी है...............
                                     

                                         जिसकी मंजिल तुम्हारी चाहत है-
                                        - भरत

5 comments:

  1. bhai....bahut hi achchha patra likha h........PAR ITNA ME KAH SAKTA HU KI YE PATRA KISI KALPNIK PREYASI K LIYE NAHI BALKI KISI VASTAVIK K LIYE LIKHA GAYA THA......PARANTU AAJ K SANDARBH ME AAP ISE KAALPANIK BATAKAR APNEAAP KO BHI JHUTHLA RAHE HO..........................
    BTW IT WAS GUD TO READ THIS ARTICLE......KEEP IT UP......:)

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  2. kuch...bhi.....ho...sir..........ye..patra..un.boys..k liye jadi booti ..ki tarah..hai..jinka pyar..unse kisi galatfahmi me door chala gaya hai....

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  3. Well done bacche........ i have heard of this letter by you earlier keep it up....

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  4. mere to kuch kuch samajh mai aya but jitna aya....its gret..!!!!!!!!!!!!
    ise is blog tak mat simit rakhna....kabhi ho sake to isko iske asli haqdar tak pahucha jarur dena....jiski chahat aapki manzil hai...!!!!!

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  5. Bayaan karna haqikat, dard maine tera samjha hai...,
    Ya mai samajh lu tod diya rista Alfazon ka apna...,

    (ki kaun hai jinke liye hriday me bhawnaaon ki baadh si aa gayi hai dost.)

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