यहाँ आतंक के साए में माँ लाचार रोती है
दिवाली हो या होली खून से हर बार होती है
अगर बेटे हो माँ के,शीश दुश्मन के कुचल डालो
उसे कुछ तो दिला दो तुम, जो कुछ हर बार खोती है......
दिवाली हो या होली खून से हर बार होती है
अगर बेटे हो माँ के,शीश दुश्मन के कुचल डालो
उसे कुछ तो दिला दो तुम, जो कुछ हर बार खोती है......
Good brother, great work.
ReplyDeleteKeep it Up!
...Nishabd ho gaya hoon mai, sach me.
ReplyDelete