बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से,
हर घड़ी हर इक खुशी इनसे मिले बस प्यार से।
रोक ना ले चूल्हा चौका चाखी इनके भाग को,
लेके परचम बेटियाँ आती दिखें हर द्वार से।
आज का ये दौर इतना तो बदलना चाहिए,
बेटियों के जन्मदिन लगने लगें त्यौहार से।
हर कदम आगे बढ़ें, मंज़िल मिले फूलें फलें,,
डगमगाएँ ना कभी संघर्ष से या हार से।
बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा
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