Wednesday, April 22, 2020

मातृ की सत्ता

चक्की अपमानों की अहिल्या को ,जड़ कर डाला ऐसे दला हो,
अपने ही कुल ने कुल वृद्धों के सम्मुख पांचाली को छला हो,
जिसने श्रष्टि रची उसको ही,यूँ सोचे जैसे अबला हो,
मातृ की सत्ता को जो नकारे उस इंसान का कैसे भला हो।
-भारत भूषण शर्मा
 गोवर्धन मथुरा
(30.08.17)

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