मिनट लगता है इनको एक ,दंगे चार करने में ,
कि बच्चों के खिलोनों को ,छुरी तलवार करने में ,
मिटा लेते हैं अपने दाग कुछ पैसे लुटाकर ये ,
किसी को ज़िन्दगी लगती है वापिस प्यार करने में। . . .
Friday, June 29, 2012
बाक़ी ........
एहसास कुछ हैं बाकी अल्फाज़ कुछ हैं बाकी
हैं सवाल मेरे बाक़ी हैं जवाब उनके बाक़ी
कही कशमकश में दिल की मेरा होश खो न दूँ मैं
कल चाहे जी जो करना अभी कम पिलाना साक़ी .................
सलीका जिनसे पाया है यहाँ पर ज़िन्दगी भर का ,
है जिनकी याद में किस्सा तुम्हारे और मेरे घर का,
भले ही अलविदा कह दूं मगर वो याद आएगा,
निभाया चार सालों में जो रिश्ता ज़िन्दगी भर का............
मेरी दीवानगी का क्या सिला उसने दिया मुझको,
वजह कोई न दी फिर भी गिला उसने दिया मुझको,
जो ग़म था दूर कोसों कोस मुझसे एक दिन यारों,
हाँ उससे इश्क़ में इक दिन मिला उसने दिया मुझको............
हर इक ज़ज्बात में मेरे वो शामिल हो तमन्ना है
नहीं है खौफ़ मरने का मुझे ये शर्त है लेकिन
कभी जब आये ऐसा दिन , वो क़ातिल हो तमन्ना है.....................