Wednesday, August 17, 2016

जाना नहीं ........

मैंने उसको उसने मुझको आज तक जाना नहीं,
यूँ गुज़र जाते हैं दोनों जैसे पहचाना नहीं ।
मैंने उसको उसने  मुझको.........

सब मोहब्बत की किताबें हैं नहीं मैंने पढ़ी ,
कैसे मैं कह दूँ हमारे जैसा अफसाना नहीं ।
मैंने उसको उसने  मुझको.........


नाप आयी आज चिड़िया आसमाँ सारा मगर,
क्या तसल्ली दे वो खुद को क्यों मिला दाना नहीं ।
मैंने उसको उसने  मुझको.........

है बदौलत जिनकी हिन्दू मुस्लिमों में वैर अब,
सबके घर जाकर वो कहते उसके घर जाना नहीं ।
मैंने उसको उसने  मुझको.........

आज से ज्यादा कहीं तब मेरा घर महफूज़ था ,
जब मोहल्ले में हुआ करता कोई थाना नहीं ।
मैंने उसको उसने  मुझको.........

-भारत भूषण शर्मा
(२७ सितम्बर २०१३ )

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