Wednesday, August 17, 2016

कोसी से कैसा सन्देश ???

कोसी तेरी इन लहरों का कहर बड़ा ही मतवाला ,
जीवन के खुशहाल खेत को तूने बंज़र कर डाला । 
कोसी तेरी इन लहरों का......................

 भाई बिछड़ा बहन से बेटी माँ से दूर हुई है,
बूढी माँ बेटे को खोकर ग़म में चूर हुई है। 
पिता की आँखों की उम्मीदें चकनाचूर हुई हैं ,
बेटे की इच्छाओं की साँसे मज़बूर हुई हैं ॥ 
जीवन दायिनी तूने जीवन का ही अर्थ बदल डाला 
कोसी तेरी इन लहरों का......................

अब किलकारी चीखें बनकर ज़ेहन में चलती हैं,
रहत शिविरों में नन्ही साँसे कैसे चलती हैं । 
जो नवजात यहाँ शिविरों में बिना दूध भूखे हैं ,
उनकी साँसों से पूछो साँसे कैसे चलती हैं ॥ 
आँखोँ में जो नीर बचा था अपने संग बहा डाला 
कोसी तेरी इन लहरों का......................

बख्शा एक न हिन्दू तूने मुसलमान भी ना बख्शा ,
पंडित क्षत्रिय वैश्य शूद्र की कौन करेगा अब रक्षा । 
बंटवारे की नयी लकीरें मालिक को मंज़ूर नहीं ,
ख़तम करो ये अभी नहीं फिर कभी न कहना ना  बख्शा ॥ 
नादानों अब तो कुछ समझो समझाता ऊपर वाला 
कोसी तेरी इन लहरों का......................


-भारत भूषण शर्मा 
(जुलाई २००८ में लिखी  कोसी नदी में आयी बाढ़ पर )

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