Thursday, February 14, 2019

तिरंगे की खातिर......

हँसते हँसते जान लुटाकर गये तिरंगे की खातिर,,,,
दिल के सब अरमान लुटाकर गये तिरंगे की खातिर,,,,
पत्नी का सिन्दूर , बहन की राखी , खिलौने बच्चों के,,,
अपना सब सामान लुटाकर गए तिरंगे की खातिर.....
-भारत भूषण शर्मा

Wednesday, October 11, 2017

बस यूँ ही..

बहुत दौलत बहुत ताकत से बेशक़ नाम बढ़ता हो,,
कभी दो पल ठहरना जिस जगह ईमान पड़ता हो,,,
तुम्हारे नाम भी है एक कोना देखते जाना,,,
कहीं राहों में आते जाते गर श्मशान पड़ता हो।।
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Sunday, October 1, 2017

प्रार्थना...शक्ति स्वरूपा बेटियों के लिए


बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से,
हर घड़ी हर इक खुशी इनसे मिले बस प्यार से।

रोक ना ले चूल्हा चौका चाखी इनके भाग को,
लेके परचम बेटियाँ आती दिखें हर द्वार से।

आज का ये दौर इतना तो बदलना चाहिए,
बेटियों के जन्मदिन लगने लगें त्यौहार से।

हर कदम आगे बढ़ें, मंज़िल मिले फूलें फलें,,
डगमगाएँ ना कभी संघर्ष से या हार से।
बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से

-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Saturday, September 23, 2017

मत पूछो

कितना उसको प्यार किया है ...मत पूछो,
किसका क्या उपकार किया है... मत पूछो।

साँसों की तो उल्टी गिनती जारी है,
कैसा कारोबार किया है... मत पूछो।

चुगली झूठ गलतफहमी से रंग रंगकर,
जीवन का अखबार किया है ...मत पूछो।

माँ बाबूजी दादी चाची गाँव में हैं,
शहर में क्या घरबार किया है... मत पूछो।

दिल की नज़रों में तो अब भी भोला हूँ,
सबने क्या इज़हार किया है ...मत पूछो।

-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Monday, August 28, 2017

मेरी याद......

मेरी याद तुमको भी आती तो होगी ,
सदा मेरी तुम तक भी जाती तो होगी ,
वो काज़ी वो फ़ितरत वो फ़तवा जुदाई ,
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।

सियासत का इक़बाल मर क्यों गया है ,
अज़ाबों से ईमान डर क्यों गया है ,
जिसे गरज़ हो बस ख़िलाफ़त करे वो ,
ये बाकी का अफ़सोस घर क्यों गया है ,
वो आदिल के ज़िंदा न रहने की आतिश ,
इबादत को तेरी जलाती तो होगी।
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
मेरी याद तुमको भी आती तो  होगी.....

(क्रमशः )
फ़ितरत = स्वभाव  अज़ाब = कष्ट , आदिल= नेक ,सच्चा  आतिश = आग

 -भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा

Friday, August 25, 2017

राम रहीम

ये कैसा हाल देख लो इंसान का हुआ,
फिर बेनकाब रुख किसी हैवान का हुआ,
बार बार कर रहा जो तार तार ज़िंदगी,
वो रहीम का हुआ न कभी राम का हुआ।
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Wednesday, August 23, 2017

तीन-तलाक़

#तीन-तलाक़
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1. कभी ना कह सकी ना सह सकी जो ज़ुल्म ढाया है,
धरम के नाम पर अबला को क्यों इतना रुलाया है,
सहूँ क्यों ज़िल्लतें बोलो तुम्हारे तीन लफ़्ज़ों से,
लो देखो आज दर्पण जो अदालत ने दिखाया है।

2.तुम्हारी ना सही मैं भी किसी की बहन बेटी हूँ,
किसी के हाथ है किस्मत सो मैं किस्मत की हेटी हूँ,
खिंचे संसद में अब रेखा बचाये मान, हक़ मेरा,
मिटे वो सेज़ काँटों की जो मैं सदियों से लेटी हूँ।

-भारत भूषण शर्मा