मेरी याद तुमको भी आती तो होगी ,
सदा मेरी तुम तक भी जाती तो होगी ,
वो काज़ी वो फ़ितरत वो फ़तवा जुदाई ,
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
सियासत का इक़बाल मर क्यों गया है ,
अज़ाबों से ईमान डर क्यों गया है ,
जिसे गरज़ हो बस ख़िलाफ़त करे वो ,
ये बाकी का अफ़सोस घर क्यों गया है ,
वो आदिल के ज़िंदा न रहने की आतिश ,
इबादत को तेरी जलाती तो होगी।
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
मेरी याद तुमको भी आती तो होगी.....
(क्रमशः )
फ़ितरत = स्वभाव अज़ाब = कष्ट , आदिल= नेक ,सच्चा आतिश = आग
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा
सदा मेरी तुम तक भी जाती तो होगी ,
वो काज़ी वो फ़ितरत वो फ़तवा जुदाई ,
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
सियासत का इक़बाल मर क्यों गया है ,
अज़ाबों से ईमान डर क्यों गया है ,
जिसे गरज़ हो बस ख़िलाफ़त करे वो ,
ये बाकी का अफ़सोस घर क्यों गया है ,
वो आदिल के ज़िंदा न रहने की आतिश ,
इबादत को तेरी जलाती तो होगी।
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
मेरी याद तुमको भी आती तो होगी.....
(क्रमशः )
फ़ितरत = स्वभाव अज़ाब = कष्ट , आदिल= नेक ,सच्चा आतिश = आग
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा