Wednesday, February 11, 2015

पेशावर में सैनिक स्कूल हमले पर…

 विद्या के मंदिर को तूने क़ब्रिस्तान बना डाला 
बारूदों के ऊपर कैसा  पाकिस्तान बना डाला 

तेरा पाल सांप तेरा ही आँगन सूना कर देगा 
दुनिया के नक़्शे में तुझको सिर्फ नमूना कर देगा 
औरों के घर आग लगाने की तू बंद दुकानें कर 
वरना तेरे ही घर म नुक्सान ये दूना कर देगा 
तूने इन सर्पों को खुद से भी बलवान बना डाला 
बारूदों के ऊपर कैसा पाकिस्तान बना डाला 

अरे पाक के वीर सैनिकों वर्दी को मत लाल करो 
तुमने बच्चों को खोया है कुछ तो ज़रा ख्याल करो 
सरहद के इस पार कभी बारूद फेंकने से पहले 
माँ बिन बच्चों कैसे जी ले खुद से कभी सवाल करो 
अपने घर आँगन में तूने क्यों शैतान बना डाला 
बारूदों के ऊपर कैसा पाकिस्तान बना डाला 

तू रख थोड़ा मौन इन्हे हम ऐसा एक सिला देंगे 
हिन्द के सैनिक दिन भर में छठवीं का दूध पिला देंगे 
तालिबान हाफ़िज़ लखवी दाऊद जो हैं सब सुन लेना 
अपनी पर आगये अगर मिटटी में तुम्हें मिला देंगे 
फिर मत कहना दुनिया से क्यों नाम निशान मिटा डाला 
बारूदों के ऊपर कैसा पाकिस्तान बना डाला 


Monday, January 5, 2015

वफ़ा.…

मुझे लहरों ने लूटा है समुन्दर में कहाँ दम था
जला दिल प्यार में आँखों में जब बारिश का मौसम था
मिली मंज़िल ना चाहत को तो ये एहसास होता है
वफ़ा  मेरी भी कच्ची थी तुम्हारा प्यार भी कम था।
-भारत भूषण शर्मा 

Saturday, December 20, 2014

दास्ताँ.....

लबों पर दास्ताँ दिल की संभालती थी मचलती थी 
किनारे आँख के आकर ना जाने क्यों फिसलती थी। 
सुलगती थी जो दिल में आग बनकर ढूंढ़ता उसको 
कोई पगली थी जो जलती थी और खुद ही पिघलती थी। 

कभी आईना देखा तो लगा तस्वीर है मेरी 
अगर देखी  हथेली तो लगा तक़दीर है मेरी। 
मेरी तस्वीर और तक़दीर में कोई नहीं थी वो 
मेरी नज़रें ही ज़ालिम थी सितमग़र मुझको छलती थी। 


अगर दीदार हो जाता खुमारी दिल की मिट जाती 
घटायें जो उदासी की उमड़ती है वो छट जाती। 
मेरी तक़दीर का शीशा तो बच जाता चटकने से 
वो धारा भी तो रुक जाती जो आखों से निकलती थी। 



Tuesday, December 9, 2014

परछाई से प्यार ...

मैं लहरों से लड़ा फिर भी समन्दर पार  कर आया ..... 
मैं जीतूंगा तुझे सब इस भरम में हारकर आया ..... 
मेरी चाहत से भी आँखों में तेरी बर्फ ना पिघली.... 
ये लगता है तेरी परछाई से में प्यार कर आया…

वो ऐसा शख़्स....

न कोई सुन सके छुपकर तुम्हारा नाम लेता है...
तुम्हें ख्वाबों में पाकर दिल की धड़कन  थाम लेता है…
नहीं खोया बहुत तुमने मगर इक शख़्स खोया है ....
वो ऐसा शख़्स शीशे में तुम्हें पहचान लेता है…

Friday, October 17, 2014

प्यार के दो चेहरे.....

चाहत भी देख ली है,नफरत भी देख ली है़....
बेइंतहा वफा की दौलत भी देख ली है..
मुझे एक ने रुलाया मैंने एक को रुलाया...
अब प्यार की ये दोनों सूरत भी देख ली है......
-भारत भूषण शर्मा

Tuesday, January 28, 2014

मुज़फ्फर नगर दंगों पर.……………।


मिनट लगता है इनको एक ,दंगे चार करने में ,
कि बच्चों के खिलोनों को ,छुरी तलवार करने में ,
मिटा लेते हैं अपने दाग  कुछ पैसे लुटाकर ये ,
किसी को ज़िन्दगी लगती है वापिस प्यार करने में। . . .