Wednesday, October 11, 2017

बस यूँ ही..

बहुत दौलत बहुत ताकत से बेशक़ नाम बढ़ता हो,,
कभी दो पल ठहरना जिस जगह ईमान पड़ता हो,,,
तुम्हारे नाम भी है एक कोना देखते जाना,,,
कहीं राहों में आते जाते गर श्मशान पड़ता हो।।
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Sunday, October 1, 2017

प्रार्थना...शक्ति स्वरूपा बेटियों के लिए


बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से,
हर घड़ी हर इक खुशी इनसे मिले बस प्यार से।

रोक ना ले चूल्हा चौका चाखी इनके भाग को,
लेके परचम बेटियाँ आती दिखें हर द्वार से।

आज का ये दौर इतना तो बदलना चाहिए,
बेटियों के जन्मदिन लगने लगें त्यौहार से।

हर कदम आगे बढ़ें, मंज़िल मिले फूलें फलें,,
डगमगाएँ ना कभी संघर्ष से या हार से।
बेटियों के भाग्य तुम लिखना विधाता प्यार से

-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Saturday, September 23, 2017

मत पूछो

कितना उसको प्यार किया है ...मत पूछो,
किसका क्या उपकार किया है... मत पूछो।

साँसों की तो उल्टी गिनती जारी है,
कैसा कारोबार किया है... मत पूछो।

चुगली झूठ गलतफहमी से रंग रंगकर,
जीवन का अखबार किया है ...मत पूछो।

माँ बाबूजी दादी चाची गाँव में हैं,
शहर में क्या घरबार किया है... मत पूछो।

दिल की नज़रों में तो अब भी भोला हूँ,
सबने क्या इज़हार किया है ...मत पूछो।

-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Monday, August 28, 2017

मेरी याद......

मेरी याद तुमको भी आती तो होगी ,
सदा मेरी तुम तक भी जाती तो होगी ,
वो काज़ी वो फ़ितरत वो फ़तवा जुदाई ,
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।

सियासत का इक़बाल मर क्यों गया है ,
अज़ाबों से ईमान डर क्यों गया है ,
जिसे गरज़ हो बस ख़िलाफ़त करे वो ,
ये बाकी का अफ़सोस घर क्यों गया है ,
वो आदिल के ज़िंदा न रहने की आतिश ,
इबादत को तेरी जलाती तो होगी।
तुम्हे फुर्सतों में रुलाती तो होगी।
मेरी याद तुमको भी आती तो  होगी.....

(क्रमशः )
फ़ितरत = स्वभाव  अज़ाब = कष्ट , आदिल= नेक ,सच्चा  आतिश = आग

 -भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा

Friday, August 25, 2017

राम रहीम

ये कैसा हाल देख लो इंसान का हुआ,
फिर बेनकाब रुख किसी हैवान का हुआ,
बार बार कर रहा जो तार तार ज़िंदगी,
वो रहीम का हुआ न कभी राम का हुआ।
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन, मथुरा

Wednesday, August 23, 2017

तीन-तलाक़

#तीन-तलाक़
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1. कभी ना कह सकी ना सह सकी जो ज़ुल्म ढाया है,
धरम के नाम पर अबला को क्यों इतना रुलाया है,
सहूँ क्यों ज़िल्लतें बोलो तुम्हारे तीन लफ़्ज़ों से,
लो देखो आज दर्पण जो अदालत ने दिखाया है।

2.तुम्हारी ना सही मैं भी किसी की बहन बेटी हूँ,
किसी के हाथ है किस्मत सो मैं किस्मत की हेटी हूँ,
खिंचे संसद में अब रेखा बचाये मान, हक़ मेरा,
मिटे वो सेज़ काँटों की जो मैं सदियों से लेटी हूँ।

-भारत भूषण शर्मा

Monday, August 21, 2017

माँ....

रिवाजें रश्में झूठी देखकर कुछ खो गया हूँ  माँ,
तेरी गोदी में सोकर फिर से बच्चा हो गया हूँ माँ,
भले हर आँख पर्दा और रिश्तों में मिलावट है,
मगर जब याद आयी तू,मैं सच्चा हो गया हूँ माँ।

भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा
२१/८ /२०१७

क्या मेरा देश सच में बदल पायेगा ???.....

जंगे आज़ादी में जां लुटाते गए,
अपने प्राणों आहुति चढ़ाते गए,
उन शहीदों की राहों पे चल पायेगा,
क्या मेरा देश सच में बदल पायेगा ??
क्या मेरा देश  सच में बदल पायेगा.......

बोस आज़ाद गाँधी खुदीराम थे ,
सिंह ऊधम भगत सबके अरमान थे ,
जान देकर भी भारत को ज़िंदा रखें,
बस इसी आस में उनके बलिदान थे..
घूसखोरी अशिक्षा गरीबी से क्या,
उनके ख्वाबों के साँचों में ढल पायेगा
क्या मेरा देश सच में  पायेगा....

हैं कन्हैया यहाँ और बराला यहाँ,
जाने कितनों का है चेहरा काला यहाँ,
भूख को रोटी है न दवा दर्द को...
बोलो कैसे करोगे उजाला यहाँ....
है शिकंजे में खादी के दम तोड़ता,
कौन जाने ये कैसे निकल पायेगा...
क्या मेरा देश सच में बदल पायेगा,
क्या मेरा देश सच में बदल पायेगा....

भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन मथुरा
१४/८ /२०१७

Monday, August 14, 2017

गोरखपुर में बच्चों की दर्दनाक मृत्यु पर...

"मासूमो के दोषी को औकात दिखादो योगी जी,
ऐसी सज़ा कराओ दिन में रात दिखादो योगी जी,
जिस विश्वास से लखनऊ भेजा उसकी इज्जत रख लेना,
भ्रस्टाचारी चोरों पर अब घात लगादो योगी जी।
रोज़ नई मर्यादाओं को नौकरशाही लांघ रही,
रिश्वत और कमिशनखोरी बच्चों का खूँ माँग रही।
भ्रष्टाचारी दानव के क्यों आगे तंत्र हुआ बौना,
कुम्भकर्ण की नींद सो रही क्यों सरकार न जाग रही।
केवल गौ गंगा गीता से भला नहीं होने वाला,
कितनों को समझाओगे हर शख्श यहां रोने वाला।
माफ करो मत कर्ज़ किसानों का पर सूरत तो बदलो,
गुंडों का हो राज़ खत्म अब यूपी की मूरत बदलो।
भावशून्य रक्षक (चिकित्सक) हो जाएं तो इंसान करेगा क्या,
मंदिर मस्जिद से बतलाओ भूखा पेट भरेगा क्या।
अंतर्मन के अपने झंझावात दिखा दो योगी जी,
मासूमों के दोषी को औकात दिखा दो योगी जी।"
-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन,मथुरा
9634207514

Thursday, August 3, 2017

ये मुहब्बत खुदा तेरा एहसान है .......

ये मुहब्बत खुदा तेरा एहसान है .......
 दम घुटा और मेरी आँख नम रह गयी,
दर्द की हर कहानी सितम कह गयी ,
इश्क़ में ये वफाओं का ईनाम है,
ये मुहब्बत खुदा तेरा एहसान है।

दिल का मालिक बनाया  था तुझको कभी
तेरी खुशियों में मुझको दिखी ज़िन्दगी
ज़िक्र तेरा तेरी याद फिर  दे गया
मेरे होठों पे फ़रियाद फिर दे गया।
लब जुदाई  के डर से जो  सिलते नहीं,
काश कह पाता  दिल का क्या अरमान है।
ये मुहब्बत खुदा तेरा........

दिल मेरा चीरकर मुस्कुराता रहा
और इशारों से मुझको बुलाता रहा
ख्वाब तेरे तेरी दिल में तस्वीर थी
आंसुओं से मैं उनको मिटाता रहा।
लाख कोशिश तो की पर मिटा न सका
चाहतों को मिटाना न आसान है।
ये मुहब्बत खुदा तेरा......


तुझसे कुछ दूर हूँ कुछ मैं मज़बूर हूँ
पर किसी की वफाओं  का सिन्दूर हूँ
है मेरी हर वफ़ा अब उसी के लिए
मेरी हर गुफ्तगू का ये एलान है।
ये मुहब्बत खुदा तेरा एहसान है।

-भारत भूषण शर्मा
गोवर्धन , मथुरा
9634207514 

Wednesday, August 2, 2017

आते-जाते...

रोज़ आते रहे रोज़ जाते रहे ,
ख्वाब में तुम मुझे यूँ सताते रहे। 
मेरी चाहत का तो हौंसला देखिये,
रूठते तुम रहे हम मनाते रहे। 
इश्क़ में हाँ मेरी ना तुम्हारी रही,
दोनों हर मोड़ पर ये जताते रहे। 
बाप माँ मर गए भूख से जूझकर ,
श्राद्ध में बच्चे भोजन कराते रहे। 
रोटियां वोट की सेंकने के लिए,
जाति मज़हब को नेता लड़ाते रहे। 
हो भला या बुरा देश का , फ़र्क़ क्या ,
वो तुम्हें तुम उन्हें आज़माते रहे। 
खूब रोतीं है इंसानियत हो विवश ,
जिसको हो गर्ज़ वो चुप कराते रहे। 
 रस्मे  कस्मे हवाला उन्हें कीजिये,
मरते दम तक जो उनको निभाते रहे। 
-भारत भूषण शर्मा 
गोवर्धन ,मथुरा 
9634207514 
 

Friday, May 12, 2017

ए ज़िंदगी.......


अरमानों को धीरे धीरे छाँट रहा हूँ...
ए ज़िंदगी देख मैं तुझे काट रहा हूँ।
तूने मुझको,मैंने तुझको खूब छकाया...
तू अपने मैं अपने रस्ते छाँट रहा हूँ।
तुझसे काँटे फूल मिले हैं मुझको दोनों,,,
ज़िंदगी देख मैं सिर्फ गुलाब बाँट रहा हूँ।
डूब न जाये वो इन आँखों के दरिया में..
इस खातिर बस पास न आये डाँट रहा हूँ।
#भारत भूषण शर्मा