#तीन-तलाक़
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1. कभी ना कह सकी ना सह सकी जो ज़ुल्म ढाया है,
धरम के नाम पर अबला को क्यों इतना रुलाया है,
सहूँ क्यों ज़िल्लतें बोलो तुम्हारे तीन लफ़्ज़ों से,
लो देखो आज दर्पण जो अदालत ने दिखाया है।
2.तुम्हारी ना सही मैं भी किसी की बहन बेटी हूँ,
किसी के हाथ है किस्मत सो मैं किस्मत की हेटी हूँ,
खिंचे संसद में अब रेखा बचाये मान, हक़ मेरा,
मिटे वो सेज़ काँटों की जो मैं सदियों से लेटी हूँ।
-भारत भूषण शर्मा
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1. कभी ना कह सकी ना सह सकी जो ज़ुल्म ढाया है,
धरम के नाम पर अबला को क्यों इतना रुलाया है,
सहूँ क्यों ज़िल्लतें बोलो तुम्हारे तीन लफ़्ज़ों से,
लो देखो आज दर्पण जो अदालत ने दिखाया है।
2.तुम्हारी ना सही मैं भी किसी की बहन बेटी हूँ,
किसी के हाथ है किस्मत सो मैं किस्मत की हेटी हूँ,
खिंचे संसद में अब रेखा बचाये मान, हक़ मेरा,
मिटे वो सेज़ काँटों की जो मैं सदियों से लेटी हूँ।
-भारत भूषण शर्मा
वाह सर, लाजवाब 👍
ReplyDeleteस्वागत मित्र
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